Category Archives: CA. K.C.Moondra

Businessmen Should Beware of Budget 2017 !!

Businessmen Should Beware of Budget 2017 !!

बजट 2017 के प्रावधानों के पर नजर डालेंगे तो हर कोई कहेगा “बजट 20 17 से Businessmen सावधान हो जाइये” वरना बहुत बड़ा नुकसान एक बिज़नस मेन को भुगतना पड़  सकता है. गरीबो की इस मसीहा सरकार ने बिज़नस मेन के लिए इतने कड़क / सख्त प्रावधान बना दिए है कि “सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी” .

एक हिन्दी अखबार ने तो यहाँ तक लिख दिया कि अब इंस्पेक्टर राज की वापसी हो सकती है ( Return Of Inspector Rule in Incometax ) . लेकिन मै यहाँ नीचे आपका ध्यान उन सख्त प्रावधानों तरफ ले जाना चाहूँगा जो कि हकीकत में Businessmen के लिए चिंताजनक है. देश का व्यापार पहले से ही मंदी की मार झेल रहा है, इन सख्त प्रावधानों से व्यापार की गति ओर धीमे हो सकती है –

  1. अब आयकर की 132(1) व धारा 132(1A) के तहत की जानी वाली सर्च (रेड) से पहले दर्ज किये जाने कारणों को किसी को भी बताने की कोई आवशयकता नहीं रहेगी जिससे आयकर अधिकारियों को फर्जीवाड़े व मनमर्जी करने की पूरी आजादी मिल जायेगी.
  1. सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी राजस्व हित में किसी भी सम्पति को अधिकतम 6 महीने के लिए अस्थाइ तोर पर कुर्क कर सकेंगे.
  1. अब यदि किसी सर्च केस में 50 लाख से ज्यादा की छिपी हुई आय / सम्पति पुराने वर्षो की उजागर होती है तो अधिकतम पिछले 10 वर्ष तक के केस पुन: खोले जा सकेंगे. यानी की अब इसे मामलों में कुल 11 वर्ष का कर-निर्धारण किया जा सकता है. जबकि वर्तमान में यह सीमा मात्र 7 वर्ष की ही थी. Earlier governments reduced such period from 16 years to 6 years. Now, government is increasing the period again.
  1. अब सर्वे की कार्यवाही धर्मार्थ संस्थानों (स्कूल, कॉलेज आदि) के विरूद्ध भी हो सकेगी.
  1. किसी भी आयकर रिटर्न में भूल सुधार करने के के समय में 1 वर्ष की कटोती कर दी गयी है जिससे देरी से गलती का पता चलने पर वह मामला भूल के स्थान पर कर-चोरी का बन जाएगा.
  1. बिना लेट फीस (पेनल्टी) के रिटर्न जमा कराने की मयाद घटा दी गयी है तथा 5000 की पेनल्टी की जगह 10,000/- तक की लेट फीस का प्रावधान कर दिया गया है.
  1. बिना कर-निर्धारण के धारा 143(1) में किसी का भी रिफंड बनता है तो अब सरकार राजस्व हित के बहाने रिफंड को रोक सकेगी. जिससे भ्रष्टाचार बढ़ सकता है.
  1. कोई भी व्यक्ति / व्यापारी / Businessmen किसी एक सोदे के पेटे एक दिन में 3.00 लाख या ज्यादा का भुगतान नकदी स्वीकार नहीं कर सकेगा. क़ानून के उल्लंघन पर 100% प्रतिशत पेनल्टी लगेगी.
  1. अब खर्चो के लिए 10,000 रू. से ज्यादा नकद भुगतान पर एक तरह से पाबंदी लगा दी गयी है. पूर्व में यह छूट सीमा 20,000/- रू. थी.
  1. अब पूंजीगत खर्चो के लिए 10,000 रू. से ज्यादा नकद भुगतान पर, उस डेप्रिसिएशन लायक सम्पति पर कोई डेप्रिसिएशन नहीं मिलेगा. पूर्व में ऐसी कोई शर्त नहीं थी.
  1. यदि किसी कंपनी (company in which the public are substantially interested व कुछ और मामलों को छोड़कर) की 50% से ज्यादा शेयर होल्डिंग बदल जाती है तो उस कंपनी को Loss Carry फॉरवर्ड का फ़ायदा नहीं मिलेगा.
  1. यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को किसी प्रॉपर्टी से बेचान से सम्बंधित किसी अग्रीमेंट के लिए किसी भी राशि का भुगतान करता है तो उस राशि पर 10% की दर से TDS की कटोती TDS जमा कराना होगा. कोई न्यूनतम सीमा नहीं रखी गयी है.
  1. TCS – यदि जिससे TCS होना है, वह व्यक्ति भूलवश भी अपना सही PAN नहीं देता है तो दोगुनी रेट या 5% (जो भी ज्यादा हो) की  दर से TCS करना होगा.
  1. यदि कोई जमीन या बिल्डिंग किसी विशेष अग्रीमेंट (डेवेलोपेर्स अग्रीमेंट) के तहत ट्रान्सफर करता है तो जिस वर्ष में अग्रीमेंट के तहत बिल्डिंग का निर्माण पूरा हो जाएगा, करदाता के हिस्से पर उस वर्ष की स्टाम्प ड्यूटी वैल्यू पर, उस वर्ष में कैपिटल गेन की आय पर बिना माल बेचे ही tax लगेगा.  इस प्रावधान से रियल एस्टेट मार्किट को धक्का लगेगा.
  1. अनलिस्टेड shares के ट्रान्सफर पर कैपिटल गेन की गणना के लिए सरकारी फोर्मुले से fair market वैल्यू की गणना की जायेगी जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा.
  1. यदि कोई भी व्यक्ति (Individual) या HUF किसी भी व्यक्ति को रू. 50,000/- मासिक किराये से ज्यादा भुगतान करता है तो ऐसे प्रत्येक व्यक्ति (Individual) या HUF को 5% दर से TDS की कटोती कर TDS जमा कराना होगा.

सीए के.सी.मूंदड़ा (CA. K.C.Moondra)

Budget - Finance Bill 2017 - Businessmen Should Beware of Budget 2017

Capital Gain – Budget 2017

Capital Gain – Budget 2017

‘Moon Soft’ ने बीड़ा उठाया है कि सरल भाषा में संक्षिप्त रूप से भारत सरकार के वितीय  बजट – 2017 के आम करदाता से जुड़े आयकर प्रावधानो को सभी पाठको के लिए प्रस्तुत किया जाए. इस श्रंखला के कुछ भाग पहले ही   प्रकाशित किये जा चुके  है. आज विशेष रूप से बजट में Capital Gain (Property etc.) Income से सम्बंधित प्रावधान का विशेष रूप से जिक्र करेंगे . साथ ही अन्य आय से सम्बंधित प्रावधान व छूट व पेनल्टी सम्बंधित प्रावधान के लिए   सम्बंधित लिंक पर क्लिक करके  पूर्व प्रकाशित कुछ अन्य प्रावधान भी पढ़ सकेंगे. बाके बचे हुए प्रावधानों पर भी अगले एक-दो दिन में चर्चा की जायेगी.

परिवृतित व नए  प्रावधान काफी ज्यादा है, अत: सरलता से समझने व पढ़ने के लिए के लिए सभी प्रावधानों को निम्न कुछ बिन्दुओ में बांटा गया है जिनको बारी बारी से सभी पाठक पढ़ सकेंगे –

    1. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
    2. हाउस प्रॉपर्टी आय से आय सम्बंधित प्रावधान
    3. बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
    4. कैपिटल गेन्स आय (Income From Capital Gain) से सम्बंधित प्रावधान
    5. अन्य स्रोतों से आय सम्बंधित प्रावधान
    6. इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
    7. पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)

कंपनियो, विदेशियों व कई कई मामलों का विवेचन यहां नहीं किया जा रहा है क्योकि उनमे आम करदाता के काम की बात नहीं है. लेखो की श्रंखला के इस भाग में आज Capital Gain (Property etc.) Income से सम्बंधित प्रावधान, पर विस्तृत  तुलनात्मक चर्चा  करेंगे. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है),  बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है),  इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से  सम्बंधित प्रावधान,  पेनल्टी  व  अन्य गंभीर प्रावधान  ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते है  –

Provisions Relating to Capital Gain (Property etc.) Income

धारा वर्तमान प्रावधान नया प्रावधान
2(42A) शेयर्स को छोड़कर अन्य सभी सम्पतियो की तीन साल से कम होल्डिंग पर उसे शोर्ट टर्म कैपिटल सम्पति माना जाता था. जमीन व भवन के लिए लैंड के लिए इस न्यूनतम तीन साल से होल्डिंग को घटाकर 2 साल कर दिया गया है जिससे अब दो साल की होल्डिंग के बाद उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल सम्पति माना जाएगा इससे करदाता को फ़ायदा होगा.
2(42A) preference shares के इक्विटी शेयर में बदलने पर इक्विटी शेयर  होल्डिंग बदलने की तारीख से मानी जा रही थी जो कि एक  विवादित मामला था. अब preference shares के इक्विटी शेयर में बदलने (Transfer) पर इक्विटी शेयर  की होल्डिंग की तारीख वो ही मानी जायेगी जो preference shares के खरीदने की तारीख थी. इससे करदाता को फ़ायदा होगा.
45 यदि कोई जमीन या बिल्डिंग किसी विशेष अग्रीमेंट (डेवेलोपेर्स अग्रीमेंट) के तहत ट्रान्सफर करता था तो जिस वर्ष में उसके हिस्से का माल बिकता, उस वर्ष में कैपिटल गेन की आय पर tax लगता था. यदि कोई जमीन या बिल्डिंग किसी विशेष अग्रीमेंट (डेवेलोपेर्स अग्रीमेंट) के तहत ट्रान्सफर करता है  तो जिस वर्ष में अग्रीमेंट के तहत बिल्डिंग का निर्माण पूरा हो जाएगा, करदाता के हिस्से पर उस वर्ष की स्टाम्प ड्यूटी वैल्यू पर, उस वर्ष में कैपिटल गेन की आय पर बिना माल बेचे ही tax लगेगा.
47 नया प्रावधान preference shares का इक्विटी shares में conversion को अब ट्रान्सफर नहीं माना जाएगा जिससे conversion पर किसी तरह के कोई कैपिटल पर tax देय नहीं होगा.
49 कुछ नये प्रावधान कई कैपिटल एसेट्स जेसे equity share , reference share , unit or units in a consolidated plan of a mutual fund scheme , transfer of specified capital asset received under the Land Pooling Scheme covered under the Andhra Pradesh Capital City Land Pooling Scheme (Formulation and Implementation) Rules, 2015 made under the provisions of Andhra Pradesh Capital Region Development Authority Act, 2014 आदि की लागत के सम्बन्ध में कई नए प्रावधान लाये गए है.
50CA नया प्रावधान अनलिस्टेड shares के ट्रान्सफर पर कैपिटल गेन की गणना के लिए सरकारी फोर्मुले से fair market वैल्यू  की गणना की जायेगी.
54EC कैपिटल गेन ( Income From Capital Gain) का National Highways Authority of India या  Rural Electrification Corporation Limited के बांड्स में निवेश पर छूट मिलती थी, अब सरकार किसी अन्य बांड्स को भी इस प्रयोजन के लिए नोटिफाई कर सकेगी.
55 01.04.1981 से पहले खरीदी गयी  पुरानी  कैपिटल एसेट्स (सम्पतियो) की लागत  01.04.1981 की fair market वैल्यू मानी जाती थी जिस पर इंडेक्स की गणना की जाती थी. अब इस कट-ऑफ तारीख (date) को 01.04.2001 कर दिया गया है.
194IB नया प्रावधान यदि कोई भी व्यक्ति (Individual) या HUF किसी भी व्यक्ति को रू. 50,000/- मासिक किराये से ज्यादा भुगतान करता है तो ऐसे प्रत्येक व्यक्ति (Individual) या HUF को 5% दर से TDS की कटोती कर TDS जमा कराना होगा.
194IC नया प्रावधान यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को किसी प्रॉपर्टी से बेचान से सम्बंधित किसी अग्रीमेंट के लिए किसी भी राशि का भुगतान करता है तो उस राशि पर 10% की दर से TDS की कटोती TDS जमा कराना होगा. कोई न्यूनतम सीमा नहीं रखी गयी है.
  1. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
  2. हाउस प्रॉपर्टी आय से आय सम्बंधित प्रावधान
  3. बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
  4. कैपिटल गेन्स आय ( Income From Capital Gain)  से सम्बंधित प्रावधान
  5. अन्य स्रोतों से आय सम्बंधित प्रावधान
  6. इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
  7. पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)

 

Capital Gain - Union Budget

Income Declaration Scheme 2016

A Book by CA K C Moondra on Income Declaration Scheme, 2016,

In the Finance budget of 2016, Finance Minister of India declared Income Declaration Scheme, 2016 through finance Bill. After passing the finance bill by both the houses of parliament and assent of President, Income Declaration Scheme, 2016 has become part of Finance Act, 2016. On this subject / scheme, there are many books available in the market. With altogether different and unique commentary, a book written by CA. K. C. Moondra is also available in the market but only online. In the online, soft book and print-book both are available through pothi.com.

As per this Income Declaration Scheme, 2016, any person can declare it’s black money / assets by paying total 45% tax on the declared income. As it appears, the scheme and terms and conditions of the scheme are not so easy. Therefore, author CA. K.C.Moondra tried his best to analyse all the provisions of Income Declaration Scheme, 2016. Such analysis is rarely seen in other books on this subject. Apart from this analytical commentary in this book, all the provisions, circulars and forms have also been made available in this book through   amazon.in in addition to pothi.com.

This  Book by CA K C Moondra on Income Declaration Scheme, 2016, is divided in to total 19 main chapters in addition to sub-chapters. Chapter No. 7 to Chapter No. 14 are really unique and well commented. Such commentary is rarely available.  In these 8 chapters, the author covered many important subjects such as Effective Tax Rate – Less than or more than 45%, What is undisclosed income, Period of declaration regarding Old incomes / Assets, Effect of Non-declaration of  Old incomes / Assets, Scheme Beneficial to Ineligible persons, Scheme As Emergency in the Income Tax World, Declaration of Benami Assets and Extent of Secrecy of the Declaration etc.

Income Declaration Scheme, 2016

Income Declaration Scheme, 2016 by CA. K.C.Moondra