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PAN Number Verification On Mobile Phone

PAN Number Verification On Mobile Phone

PAN Number Verification On Mobile Phone : Till now, PAN verification was made through official website of Income-tax Department which has been discontinued. Therefore, free PAN verification service has been closed even by all private service providers. PAN Verification through name is now not possible. In these circumstances, Moon Soft has restarted it’s old PAN verification service through it’s parent website www.etdsdesc.com . Any body is interested to verify any PAN number, he may place his/her order by clicking here. In this, order may be placed online with online facility of payment.

PAN Number Verification On Mobile Phone : But now one Associate of Moon Soft has started an unique service ” Verify PAN – Mobile “. In this service, one can place hius/her PAN Verification Order by Whatsapp (Mobile) and make payment through any ‘Mobile Wallet’ like BHIM, Mobikwik and Paytm etc. Please be clarified that after providing PAN Number, only exact complete name (First Name, Middle Name and Last / Surname) will be verified / confirmed.

PAN Number Verification On Mobile Phone – Verification (व्हाट्सएप्प पर पेन नंबर)  : And thus, now any one can apply for PAN verification via mobile. It’s simple and easy!!! Before you proceed for Pan Verification on Mobile / Whatsapp, please read following guidelines –

Ø Checklist before you Apply for PAN Verification on Mobile / Whatsapp :

  1. PAN  / PAN Number (Permanent Account Number) you want to verify
  2. You should have operative WhatsApp Facility

Ø Charges: Rs. 20/- per PAN Verification

Ø How to Apply:

You may apply for PAN Verification through WhatsApp in 2 simple steps –

  1. Make Payment of requisite amount for PAN Verification using any payment App such as
  • BHIM,
  • Paytm,
  • MobiKwik, etc.

to  Phone No. +91000000000  (Coming soon)

There is policy of ‘No Refund Policy’ under any circumstances for this service. So please read all the instructions carefully on this page before you apply.

  1. Send the 
  • Payment proof i.e. Payment Confirmation Message
  • PAN Number/s (you desire to verify)

via WhatsApp to +91 000000000 (Coming soon)

Ø Finally, Moon Soft’s Associate  shall

  • verify the PAN Number/s and
  • send the verification results to you via Whatsapp only (generally within 2-3 working days)

Ø  If you don’t have Whatsapp and payment App / Mobile Wallet, you can apply by clicking here under –

Verify PAN NUmber

 

Pan Card Name mismatches with Pan Card Database ?

Pan Card Name mismatches with Pan Card Database ?   

Subject of this post may be surprising for readers and pan card holders. But there are many chances that Pan Card Name may mismatches with the name in Pan Card Database. Therefore, it is important to know why Pan Card Name mismatches with Pan Card Database ? This mismatch may result into some serious problems some times and therefore, necessary precautions should be taken. इस रिपोर्ट का शीर्षक शायद आपको अजीब लग सकता है. लेकिन इस बात की काफी संभावना है कि पेनकार्ड पर छपा हुआ आपका नाम पेन रिकॉर्ड से नहीं मिलता हो. जिसके कारण आपके पेन कार्ड को एकबारगी फर्जी या झूठा माना जा सकता है.

क्या पेन कार्ड झूठा या फर्जी है – यदि पेनकार्ड पर छपा हुआ आपका नाम (Pan Card Name) पेनकार्ड के सरकारी  रिकॉर्ड (डेटाबेस -Pan Card Database) से नहीं मिलता है, तो जरूरी नहीं है कि आपका पेनकार्ड झूठा या फर्जी है बल्कि पेन कार्ड पर थोड़ा नाम अलग होने बावजूद भी, आपका पेन कार्ड सही हो सकता है.

दो मामूली अलग-अलग नाम सही क्यों  – हकीकत यह है कि पेन कार्ड  का आवेदन करते समय, आवेदक को अपने दो नाम आवेदन पत्र में भरने होते है. एक पूरा नाम सरकारी रिकॉर्ड (डेटाबेस -Pan Card Database) के लिए तथा दूसरा पूरा या छोटा नाम  पेन कार्ड पर छापने (Pan Card Name) के लिए. यदि कोई भी आवेदक दोनों नाम एक समान रखता है तो दोनों जगह बिना अंतर के एक ही नाम रहेगा. लेकिन यदि दोनों नाम कुछ-कुछ अलग है तो पेन कार्ड पर अलग नाम होगा तथा सरकारी रिकॉर्ड (डेटाबेस Pan Card Database) में अलग नाम होगा (जेसे – Ramesh Chandra Jain – Ramesh C Jain) इसी स्थिति में यदि आप पेन नंबर का कभी भी डेटाबेस के साथ मिलान करेंगे तो आपको फर्क दिखेगा. इस तरह से दोनों नाम सही होते हुए भी दोनों अलग-अलग दिखेंगे जिससे आपको कई जगह परेशानी हो सकती है.

समस्या का हल क्या है – यदि मिलान / वेरिफिकेशन (PAN Verification) करने पर फर्क आता है को घबराये नहीं तथा सरकारी रिकॉर्ड (डेटाबेस – Pan Card Database)  में उपलब्ध नाम को ही सही माने. लेकिन विवाद से बचने के लिए मै सभी पेन कार्ड धारको को निम्न दो सलाहे देना चाहूंगा –

  1. जब भी नए पेन कार्ड के लिए या करेक्शन के लिए या रीप्रिंट के लिए आवेदन करे, तो दोनों नाम एक ही रखे. मामूली अंतर के साथ भी दो अलग-अलग नाम उपयोग में नहीं लेवे. Always try to keep same full name on Pan Card as well as in database while applying for New Pan Card / Correction Pan Card / Reprint Pan Card.
  1. यदि वर्तमान में आपके दोनों नामो में फर्क है, आपको पेन कार्ड में करेक्शन / सुधार के लिए आवेदन करके, दोनों नाम एक समान (100%) करवा लेने चाहिए. If there is difference in both the names, apply for correction in name  on Pan Card and make both the name 100% identical.

PAN Number on Whatsapp – व्हाट्सएप्प पर पेन नंबर

PAN Number on Whatsapp – Verification (व्हाट्सएप्प पर पेन नंबर)

PAN Number on Whatsapp – Verification (व्हाट्सएप्प पर पेन नंबर) : Till now, PAN verification was made through official website of Income-tax Department which has been discontinued. Therefore, free PAN verification service has been closed even by all private service providers. PAN Verification through name is now not possible. In these circumstances, Moon Soft has restarted it’s old PAN verification service through it’s parent website www.etdsdesc.com . Any body is interested to verify any PAN number, he may place his/her order by clicking here. In this, order may be placed online with online facility of payment.

PAN Number on Whatsapp – Verification (व्हाट्सएप्प पर पेन नंबर)  : But now one Associate of Moon Soft has started an unique service ” Verify PAN – Mobile “. In this service, one can place hius/her PAN Verification Order by Whatsapp (Mobile) and make payment through any ‘Mobile Wallet’ like BHIM, Mobikwik and Paytm etc. Please be clarified that after providing PAN Number, only exact complete name (First Name, Middle Name and Last / Surname) will be verified / confirmed.

PAN Number on Whatsapp – Verification (व्हाट्सएप्प पर पेन नंबर)  : And thus, now any one can apply for PAN verification via mobile. It’s simple and easy!!! Before you proceed for Pan Verification on Mobile / Whatsapp, please read following guidelines –

Ø Checklist before you Apply for PAN Verification on Mobile / Whatsapp :

  1. PAN  / PAN Number (Permanent Account Number) you want to verify
  2. You should have operative WhatsApp Facility

Ø Charges: Rs. 20/- per PAN Verification

Ø How to Apply:

You may apply for PAN Verification through WhatsApp in 2 simple steps –

  1. Make Payment of requisite amount for PAN Verification using any payment App such as
  • BHIM,
  • Paytm,
  • MobiKwik, etc.

to  Phone No. +91000000000  (Coming soon)

There is policy of ‘No Refund Policy’ under any circumstances for this service. So please read all the instructions carefully on this page before you apply.

  1. Send the 
  • Payment proof i.e. Payment Confirmation Message
  • PAN Number/s (you desire to verify)

via WhatsApp to +91 000000000 (Coming soon)

Ø Finally, Moon Soft’s Associate  shall

  • verify the PAN Number/s and
  • send the verification results to you via Whatsapp only (generally within 2-3 working days)

Ø  If you don’t have Whatsapp and payment App / Mobile Wallet, you can apply by clicking here under –

Verify PAN NUmber

 

Businessmen Should Beware of Budget 2017 !!

Businessmen Should Beware of Budget 2017 !!

बजट 2017 के प्रावधानों के पर नजर डालेंगे तो हर कोई कहेगा “बजट 20 17 से Businessmen सावधान हो जाइये” वरना बहुत बड़ा नुकसान एक बिज़नस मेन को भुगतना पड़  सकता है. गरीबो की इस मसीहा सरकार ने बिज़नस मेन के लिए इतने कड़क / सख्त प्रावधान बना दिए है कि “सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी” .

एक हिन्दी अखबार ने तो यहाँ तक लिख दिया कि अब इंस्पेक्टर राज की वापसी हो सकती है ( Return Of Inspector Rule in Incometax ) . लेकिन मै यहाँ नीचे आपका ध्यान उन सख्त प्रावधानों तरफ ले जाना चाहूँगा जो कि हकीकत में Businessmen के लिए चिंताजनक है. देश का व्यापार पहले से ही मंदी की मार झेल रहा है, इन सख्त प्रावधानों से व्यापार की गति ओर धीमे हो सकती है –

  1. अब आयकर की 132(1) व धारा 132(1A) के तहत की जानी वाली सर्च (रेड) से पहले दर्ज किये जाने कारणों को किसी को भी बताने की कोई आवशयकता नहीं रहेगी जिससे आयकर अधिकारियों को फर्जीवाड़े व मनमर्जी करने की पूरी आजादी मिल जायेगी.
  1. सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी राजस्व हित में किसी भी सम्पति को अधिकतम 6 महीने के लिए अस्थाइ तोर पर कुर्क कर सकेंगे.
  1. अब यदि किसी सर्च केस में 50 लाख से ज्यादा की छिपी हुई आय / सम्पति पुराने वर्षो की उजागर होती है तो अधिकतम पिछले 10 वर्ष तक के केस पुन: खोले जा सकेंगे. यानी की अब इसे मामलों में कुल 11 वर्ष का कर-निर्धारण किया जा सकता है. जबकि वर्तमान में यह सीमा मात्र 7 वर्ष की ही थी. Earlier governments reduced such period from 16 years to 6 years. Now, government is increasing the period again.
  1. अब सर्वे की कार्यवाही धर्मार्थ संस्थानों (स्कूल, कॉलेज आदि) के विरूद्ध भी हो सकेगी.
  1. किसी भी आयकर रिटर्न में भूल सुधार करने के के समय में 1 वर्ष की कटोती कर दी गयी है जिससे देरी से गलती का पता चलने पर वह मामला भूल के स्थान पर कर-चोरी का बन जाएगा.
  1. बिना लेट फीस (पेनल्टी) के रिटर्न जमा कराने की मयाद घटा दी गयी है तथा 5000 की पेनल्टी की जगह 10,000/- तक की लेट फीस का प्रावधान कर दिया गया है.
  1. बिना कर-निर्धारण के धारा 143(1) में किसी का भी रिफंड बनता है तो अब सरकार राजस्व हित के बहाने रिफंड को रोक सकेगी. जिससे भ्रष्टाचार बढ़ सकता है.
  1. कोई भी व्यक्ति / व्यापारी / Businessmen किसी एक सोदे के पेटे एक दिन में 3.00 लाख या ज्यादा का भुगतान नकदी स्वीकार नहीं कर सकेगा. क़ानून के उल्लंघन पर 100% प्रतिशत पेनल्टी लगेगी.
  1. अब खर्चो के लिए 10,000 रू. से ज्यादा नकद भुगतान पर एक तरह से पाबंदी लगा दी गयी है. पूर्व में यह छूट सीमा 20,000/- रू. थी.
  1. अब पूंजीगत खर्चो के लिए 10,000 रू. से ज्यादा नकद भुगतान पर, उस डेप्रिसिएशन लायक सम्पति पर कोई डेप्रिसिएशन नहीं मिलेगा. पूर्व में ऐसी कोई शर्त नहीं थी.
  1. यदि किसी कंपनी (company in which the public are substantially interested व कुछ और मामलों को छोड़कर) की 50% से ज्यादा शेयर होल्डिंग बदल जाती है तो उस कंपनी को Loss Carry फॉरवर्ड का फ़ायदा नहीं मिलेगा.
  1. यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को किसी प्रॉपर्टी से बेचान से सम्बंधित किसी अग्रीमेंट के लिए किसी भी राशि का भुगतान करता है तो उस राशि पर 10% की दर से TDS की कटोती TDS जमा कराना होगा. कोई न्यूनतम सीमा नहीं रखी गयी है.
  1. TCS – यदि जिससे TCS होना है, वह व्यक्ति भूलवश भी अपना सही PAN नहीं देता है तो दोगुनी रेट या 5% (जो भी ज्यादा हो) की  दर से TCS करना होगा.
  1. यदि कोई जमीन या बिल्डिंग किसी विशेष अग्रीमेंट (डेवेलोपेर्स अग्रीमेंट) के तहत ट्रान्सफर करता है तो जिस वर्ष में अग्रीमेंट के तहत बिल्डिंग का निर्माण पूरा हो जाएगा, करदाता के हिस्से पर उस वर्ष की स्टाम्प ड्यूटी वैल्यू पर, उस वर्ष में कैपिटल गेन की आय पर बिना माल बेचे ही tax लगेगा.  इस प्रावधान से रियल एस्टेट मार्किट को धक्का लगेगा.
  1. अनलिस्टेड shares के ट्रान्सफर पर कैपिटल गेन की गणना के लिए सरकारी फोर्मुले से fair market वैल्यू की गणना की जायेगी जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा.
  1. यदि कोई भी व्यक्ति (Individual) या HUF किसी भी व्यक्ति को रू. 50,000/- मासिक किराये से ज्यादा भुगतान करता है तो ऐसे प्रत्येक व्यक्ति (Individual) या HUF को 5% दर से TDS की कटोती कर TDS जमा कराना होगा.

सीए के.सी.मूंदड़ा (CA. K.C.Moondra)

Budget - Finance Bill 2017 - Businessmen Should Beware of Budget 2017

Incometax Rebates / Deductions / Rates – Budget 2017

Incometax Rebates / Deductions /  Rates – Budget 2017

‘Moon Soft’ ने बीड़ा उठाया है कि सरल भाषा में संक्षिप्त रूप से भारत सरकार के वितीय  बजट – 2017 के आम करदाता से जुड़े आयकर प्रावधानो को सभी पाठको के लिए प्रस्तुत किया जाए. इस श्रंखला के अभी तक कई लेख प्रकाशित हो चुके  है. आज विशेष रूप से बजट में Incometax Rebates / Deductions /   Rates – Budget 2017 (इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो) से सम्बंधित प्रावधान का  जिक्र करेंगे . साथ ही पेनल्टी सम्बंधित प्रावधान के लिए व पूर्व प्रकाशित लेखो के  सम्बंधित लिंक पर क्लिक करके  पूर्व प्रकाशित कुछ अन्य प्रावधान भी पढ़ सकेंगे. बाके बचे हुए प्रावधानों पर भी अगले एक-दो दिन में चर्चा की जायेगी.

परिवृतित व नए  प्रावधान काफी ज्यादा है, अत: सरलता से समझने व पढ़ने के लिए के लिए सभी प्रावधानों को निम्न कुछ बिन्दुओ में बांटा गया है जिनको बारी बारी से सभी पाठक पढ़ सकेंगे –

    1. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
    2. हाउस प्रॉपर्टी आय से आय सम्बंधित प्रावधान
    3. बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
    4. कैपिटल गेन्स आय से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
    5. अन्य स्रोतों से आय सम्बंधित प्रावधान
    6. Incometax Rebates / Deductions /   Rates – Budget 2017 – इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से से सम्बंधित प्रावधान (यही नीचे पढ़े)
    7. पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)

कंपनियो, विदेशियों व कई कई मामलों का विवेचन यहां नहीं किया जा रहा है क्योकि उनमे आम करदाता के काम की बात नहीं है. लेखो की श्रंखला के इस भाग में आज इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से सम्बंधित प्रावधान, पर विस्तृत  तुलनात्मक चर्चा  करेंगे. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है),  बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है),  कैपिटल गेन्स आय से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है) तथा  पेनल्टी  व  अन्य गंभीर प्रावधान  ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते है  –

A. Incometax  Rebates / Deductions 

धारा वर्तमान प्रावधान   नया प्रावधान

10(13A)

नया प्रावधान राजानीतिक पार्टियो द्वारा रू. 2,000/- से ज्यादा का चन्दा रोकड़ से लेने पर उस आय पर tax लगेगा.
80CCD वर्तमान में केंद्र सरकार के अलावा अन्य कर्मचारियों को सरकार द्वारा notified पेंसन फण्ड में जमा राशि पर कटोती मिलती थी जिसकी अधिकतम सीमा सकल कुल आय (Gross Total Income) की 10% थी. इस कटोती की सीमा को 20% तक बढ़ा दिया गया है.
80CCG

अभी तक notified equity savings scheme में अधिकतम 12,500/- की कटोती मिलती थी.

नए सिरे से यह कटोती समाप्त कर दी गयी है.

80G रू.10,000/- से ज्यादा नकदी दान (Donation) पर कटोती नहीं मिलती थी. अब रू. 2,000/- से ज्यादा नकदी दान (Donation) पर कटोती नहीं मिलेगी.
87A यदि कुल आय 5.00 लाख से कम  है तो अधिकतम  2,000/- की रिबेट इनकम-tax में से मिलती थी जिससे 2.70 तक की कुल आय पर शून्य आयकर बनता था.

यदि कुल आय 3.50 लाख से कम  है तो अधिकतम  2,500/- की रिबेट इनकम-tax में से मिलेगी जिससे 3.00  लाख तक की कुल आय पर शून्य आयकर बनेगा यानिकी यदि कुल आय 3.00 लाख तक ही है तो वह पूर्णत: आयकर मुक्त रहेगी.

115JB

Minimum Alternate Tax की कैलकुलेशन के लिए कम्पनीज एक्ट के प्रावधानों के अनुसार बुक प्रॉफिट को कंसीडर किया जाता रहा है.

Minimum Alternate Tax की कैलकुलेशन के लिए कम्पनीज एक्ट के प्रावधानों के साथ एकाउंटिंग स्टैण्डर्ड अनुसार बुक प्रॉफिट को कंसीडर किया जायेगा.

132

नए प्रावधान

(क) अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ सर्च करने से पहले रिकॉर्ड किये जाने वाले विश्वास के कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अप्रैल 1962 से प्रभावी रहेगा.

(ख)     अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ सर्च करने से पहले शंका के कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अक्टूबर 1975 से प्रभावी रहेगा.

(ग)     सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी उच्च अधिकारियों की इजाजत से राजस्व हित में किसी भी सम्पति को अधिकतम 6 महीने के लिए अस्थाइ तोर पर कुर्क कर सकेंगे.

(घ)     सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी किसी भी स्थाई सम्पति को धारा 142A के प्रावधानों के तहत वैल्यूएशन के लिए वैल्यूएशन ऑफिसर रेफ़र कर सकेंगे जिसे 60 दिन के अन्दर-अन्दर वैल्यूएशन रिपोर्ट देनी होगी.

(ङ)      आदि.

132A

नया प्रावधान

अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ से कोई भी दस्तावेज, बहुमूल्य ज्वेलरी व नकदी आदि को अन्य किसी विभाग से रिकवीजिसन (मंगाने) से पहले दर्ज किये जाने वाले कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अक्टूबर 1975 से प्रभावी रहेगा.
133(6) किसी भी लंबित केस में जांच के लिए दस्तावेज आदि मंगवाने का अधिकार.

अब यह अधिकार Joint Director, Deputy Director or Assistant Director को भी होगा जो कि किसी लंबित केस के अभाव में भी नोटिस दे सकेंगे.

133A अभी तक सर्वे की कार्यवाही व्यापारिक स्थल पर ही होती थी. अब सर्वे की कार्यवाही धर्मार्थ संस्थानों (स्कूल, कॉलेज आदि) के विरूद्ध भी हो सकेगी.

B. Income Tax Rates For Assessment Year 2017-18 (Previous Year To be Ended on 31.03.2017

(I) In the case of every individual other than the individual referred to in items (II) and (III) of this Paragraph or Hindu undivided family or association of persons or body of individuals, whether incorporated or not, or every artificial juridical person referred to in sub-clause (vii) of clause (31) of section 2 of the Income-tax Act, not being a case to which any other Paragraph of this Part applies,— 

S.No. Income Range Tax Rate
(1)

where the total income does not exceed Rs. 2,50,000

 Nil;
(2) where the total income exceeds Rs. 2,50,000 but does not exceed Rs. 5,00,000  5 per cent. of the amount by which the total income  exceeds Rs. 2,50,000;
(3) where the total income exceeds Rs. 5,00,000 but does not exceed Rs. 10,00,000  Rs. 12,500 plus 20 per cent. of the amount by  which the total income exceeds Rs. 5,00,000;
(4) where the total income exceeds Rs. 10,00,000 

 Rs. 1,12,500 plus 30 per cent. of the amount by  which the total income exceeds Rs. 10,00,000.

 

(II) In the case of every individual, being a resident in India, who is of the age of sixty years or more but less than eighty years at any time during the previous year,—

S.No. Income Range Tax Rate
(1)

where the total income does not exceed Rs. 3,00,000

 Nil; 
(2) where the total income exceeds Rs. 3,00,000 but does not exceed Rs. 5,00,000  5 per cent. of the amount by which the total income  exceeds Rs. 3,00,000;
(3) where the total income exceeds Rs. 5,00,000 but does not exceed Rs. 10,00,000  Rs. 10,000 plus 20 per cent. of the amount by  which the total income exceeds Rs. 5,00,000;
(4) where the total income exceeds Rs. 10,00,000   Rs. 1,10,000 plus 30 per cent. of the amount by  which the total income exceeds Rs. 10,00,000.

(III) In the case of every individual, being a resident in India, who is of the age of eighty years or more at any time during the previous year—  Rates of income-tax 

S.No. Income Range Tax Rate
(1)

where the total income does not exceed Rs. 5,00,000

  Nil; 
(2) where the total income exceeds Rs. 5,00,000 but does not exceed Rs. 10,00,000  20 per cent. of the amount by which the total  income exceeds Rs. 5,00,000; 
(3) where the total income exceeds Rs. 10,00,000 

 Rs. 1,00,000 plus 30 per cent. of the amount by  which the total income exceeds Rs. 10,00,000.

Surcharge on income-tax

The amount of income-tax computed in accordance with the preceding provisions of this Paragraph, or the provisions of section 111A or section 112 of the Income-tax Act, shall be increased by a surcharge for the purposes of the Union, calculated, in the case of every individual or Hindu undivided family or association of persons or body of individuals, whether incorporated or not, or every artificial juridical person referred to in sub-clause (vii) of clause (31) of section 2 of the Income-tax Act,—

(a) having a total income exceeding fifty lakh rupees but not exceeding one crore rupees, at the rate of ten per cent. of such income-tax; and

(b) having a total income exceeding one crore rupees, at the rate of fifteen per cent. of such income-tax:

 Provided that in the case of persons mentioned above having total income exceeding,—

(a) fifty lakh rupees but not exceeding one crore rupees, the total amount payable as income-tax and surcharge on such income shall not exceed the total amount payable as income-tax on a total ncome of fifty lakh rupees by more than the amount of income that exceeds fifty lakh rupees;

(b) one crore rupees, the total amount payable as income-tax and surcharge on such income shall not exceed the total amount payable as income-tax and surcharge on a total income of one crore rupees by more than the amount of income that exceeds one crore rupees.

IV. In the case of every co-operative society,—

Rates of income-tax 

S.No. Income Range Tax Rate
(1) where the total income does not exceed Rs.10,000  10 per cent. of the total income;
(2) where the total income exceeds Rs.10,000 but does not exceed Rs. 20,000  Rs.1,000 plus 20 per cent. of the amount by which  the total income exceeds Rs.10,000;
(3) where the total income exceeds Rs. 20,000  Rs. 3,000 plus 30 per cent. of the amount by which  the total income exceeds Rs. 20,000.

Surcharge on income-tax

The amount of income-tax computed in accordance with the preceding provisions of this Paragraph, or the provisions of section 111A or section 112 of the Income-tax Act, shall, in the case of every co-operative society, having a total income exceeding one crore rupees, be increased by a surcharge for the purposes of the Union calculated at the rate of twelve per cent. of such incometax:

Provided that in the case of every co-operative society mentioned above having total income exceeding one crore rupees, the total amount payable as income-tax and surcharge on such income shall not exceed the total amount payable as income-tax on a total income of one crore rupees by more than the amount of income that exceeds one crore rupees.

V. In the case of every firm,—

Rate of income-tax

S.No. Income Range Tax Rate
(1) On the whole of the total income  30 per cent.

Surcharge on income-tax

The amount of income-tax computed in accordance with the preceding provisions of this Paragraph, or the provisions of section 111A or section 112 of the Income-tax Act, shall, in the case of every firm, having a total income exceeding one crore rupees, be increased by a surcharge for the purposes of the Union calculated at the rate of twelve per cent. of such income-tax:

Provided that in the case of every firm mentioned above having total income exceeding one crore rupees, the total amount payable as income-tax and surcharge on such income shall not exceed the total amount payable as income-tax on a total income of one crore rupees by more than the amount of income that exceeds one crore rupees.

VI. In the case of every local authority,—

Rate of income-tax

S.No. Income Range Tax Rate
(1) On the whole of the total income 30 per cent.

Surcharge on income-tax

The amount of income-tax computed in accordance with the preceding provisions of this Paragraph, or the provisions of section 111A or section 112 of the Income-tax Act, shall, in the case of every local authority, having a total income exceeding one crore rupees, be increased by a surcharge for the purposes of the Union calculated at the rate of twelve per cent.of such income-tax:

Provided that in the case of every local authority mentioned above having total income exceeding one crore rupees, the total amount payable as income-tax and surcharge on such income shall not exceed the total amount payable as income-tax on a total income of one crore rupees by more than the amount of income that exceeds one crore rupees.

VII.  In the case of a company,—

I. In the case of a domestic company,— 

S.No. Income Range Tax Rate
(i)

where its total turnover or the gross receipt in the previous year 2015-16 does not exceed fifty crore rupees;

 25 per cent. of the total income;
(ii) other than that referred to in item (i)  30 per cent. of the total income.


II. In the case of a company other than a domestic company,—

S.No. Income Range Tax Rate
(i) on so much of the total income as consists of,—

 (a) royalties received from Government or an Indian concern in pursuance of an agreement made by it with the Government or the Indian concern after the 31st day of March, 1961 but before the 1st day of April, 1976; or

(b) fees for rendering technical services received from Government or an Indian concern in pursuance of an agreement made by it with the Government or the Indian concern after the 29th day of February, 1964 but before the 1st day of April, 1976, and where such agreement has, in either case, been approved by the Central Government

 50 per cent.;

 

(ii) on the balance, if any, of the total income  40 per cent.

Surcharge on income-tax

The amount of income-tax computed in accordance with the preceding provisions of this Paragraph, or the provisions of section 111A or section 112 of the Income-tax Act, shall, be increased by a surcharge for the purposes of the Union, calculated,––

(i) in the case of every domestic company,––

(a) having a total income exceeding one crore rupees but not exceeding ten crore rupees, at the rate of seven per cent. Of such income-tax; and

(b) having a total income exceeding ten crore rupees, at the rate of twelve per cent. of such income-tax;

(ii) in the case of every company other than a domestic company,––

(a) having a total income exceeding one crore rupees but not exceeding ten crore rupees, at the rate of two per cent. Of such income-tax; and

(b) having a total income exceeding ten crore rupees, at the rate of five per cent. of such income-tax:

Provided that in the case of every company having a total income exceeding one crore rupees but not exceeding ten crore rupees, the total amount payable as income-tax and surcharge on such income shall not exceed the total amount payable as income-tax on a total income of one crore rupees by more than the amount of income that exceeds one crore rupees:

Provided further that in the case of every company having a total income exceeding ten crore rupees, the total amount payable as income-tax and surcharge on such income shall not exceed the total amount payable as income-tax and surcharge on a total income of ten crore rupees by more than the amount of income that exceeds ten crore rupees.

Union Budget - Incometax Rebates, Deductions, Rates

Capital Gain – Budget 2017

Capital Gain – Budget 2017

‘Moon Soft’ ने बीड़ा उठाया है कि सरल भाषा में संक्षिप्त रूप से भारत सरकार के वितीय  बजट – 2017 के आम करदाता से जुड़े आयकर प्रावधानो को सभी पाठको के लिए प्रस्तुत किया जाए. इस श्रंखला के कुछ भाग पहले ही   प्रकाशित किये जा चुके  है. आज विशेष रूप से बजट में Capital Gain (Property etc.) Income से सम्बंधित प्रावधान का विशेष रूप से जिक्र करेंगे . साथ ही अन्य आय से सम्बंधित प्रावधान व छूट व पेनल्टी सम्बंधित प्रावधान के लिए   सम्बंधित लिंक पर क्लिक करके  पूर्व प्रकाशित कुछ अन्य प्रावधान भी पढ़ सकेंगे. बाके बचे हुए प्रावधानों पर भी अगले एक-दो दिन में चर्चा की जायेगी.

परिवृतित व नए  प्रावधान काफी ज्यादा है, अत: सरलता से समझने व पढ़ने के लिए के लिए सभी प्रावधानों को निम्न कुछ बिन्दुओ में बांटा गया है जिनको बारी बारी से सभी पाठक पढ़ सकेंगे –

    1. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
    2. हाउस प्रॉपर्टी आय से आय सम्बंधित प्रावधान
    3. बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
    4. कैपिटल गेन्स आय (Income From Capital Gain) से सम्बंधित प्रावधान
    5. अन्य स्रोतों से आय सम्बंधित प्रावधान
    6. इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
    7. पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)

कंपनियो, विदेशियों व कई कई मामलों का विवेचन यहां नहीं किया जा रहा है क्योकि उनमे आम करदाता के काम की बात नहीं है. लेखो की श्रंखला के इस भाग में आज Capital Gain (Property etc.) Income से सम्बंधित प्रावधान, पर विस्तृत  तुलनात्मक चर्चा  करेंगे. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है),  बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है),  इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से  सम्बंधित प्रावधान,  पेनल्टी  व  अन्य गंभीर प्रावधान  ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते है  –

Provisions Relating to Capital Gain (Property etc.) Income

धारा वर्तमान प्रावधान नया प्रावधान
2(42A) शेयर्स को छोड़कर अन्य सभी सम्पतियो की तीन साल से कम होल्डिंग पर उसे शोर्ट टर्म कैपिटल सम्पति माना जाता था. जमीन व भवन के लिए लैंड के लिए इस न्यूनतम तीन साल से होल्डिंग को घटाकर 2 साल कर दिया गया है जिससे अब दो साल की होल्डिंग के बाद उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल सम्पति माना जाएगा इससे करदाता को फ़ायदा होगा.
2(42A) preference shares के इक्विटी शेयर में बदलने पर इक्विटी शेयर  होल्डिंग बदलने की तारीख से मानी जा रही थी जो कि एक  विवादित मामला था. अब preference shares के इक्विटी शेयर में बदलने (Transfer) पर इक्विटी शेयर  की होल्डिंग की तारीख वो ही मानी जायेगी जो preference shares के खरीदने की तारीख थी. इससे करदाता को फ़ायदा होगा.
45 यदि कोई जमीन या बिल्डिंग किसी विशेष अग्रीमेंट (डेवेलोपेर्स अग्रीमेंट) के तहत ट्रान्सफर करता था तो जिस वर्ष में उसके हिस्से का माल बिकता, उस वर्ष में कैपिटल गेन की आय पर tax लगता था. यदि कोई जमीन या बिल्डिंग किसी विशेष अग्रीमेंट (डेवेलोपेर्स अग्रीमेंट) के तहत ट्रान्सफर करता है  तो जिस वर्ष में अग्रीमेंट के तहत बिल्डिंग का निर्माण पूरा हो जाएगा, करदाता के हिस्से पर उस वर्ष की स्टाम्प ड्यूटी वैल्यू पर, उस वर्ष में कैपिटल गेन की आय पर बिना माल बेचे ही tax लगेगा.
47 नया प्रावधान preference shares का इक्विटी shares में conversion को अब ट्रान्सफर नहीं माना जाएगा जिससे conversion पर किसी तरह के कोई कैपिटल पर tax देय नहीं होगा.
49 कुछ नये प्रावधान कई कैपिटल एसेट्स जेसे equity share , reference share , unit or units in a consolidated plan of a mutual fund scheme , transfer of specified capital asset received under the Land Pooling Scheme covered under the Andhra Pradesh Capital City Land Pooling Scheme (Formulation and Implementation) Rules, 2015 made under the provisions of Andhra Pradesh Capital Region Development Authority Act, 2014 आदि की लागत के सम्बन्ध में कई नए प्रावधान लाये गए है.
50CA नया प्रावधान अनलिस्टेड shares के ट्रान्सफर पर कैपिटल गेन की गणना के लिए सरकारी फोर्मुले से fair market वैल्यू  की गणना की जायेगी.
54EC कैपिटल गेन ( Income From Capital Gain) का National Highways Authority of India या  Rural Electrification Corporation Limited के बांड्स में निवेश पर छूट मिलती थी, अब सरकार किसी अन्य बांड्स को भी इस प्रयोजन के लिए नोटिफाई कर सकेगी.
55 01.04.1981 से पहले खरीदी गयी  पुरानी  कैपिटल एसेट्स (सम्पतियो) की लागत  01.04.1981 की fair market वैल्यू मानी जाती थी जिस पर इंडेक्स की गणना की जाती थी. अब इस कट-ऑफ तारीख (date) को 01.04.2001 कर दिया गया है.
194IB नया प्रावधान यदि कोई भी व्यक्ति (Individual) या HUF किसी भी व्यक्ति को रू. 50,000/- मासिक किराये से ज्यादा भुगतान करता है तो ऐसे प्रत्येक व्यक्ति (Individual) या HUF को 5% दर से TDS की कटोती कर TDS जमा कराना होगा.
194IC नया प्रावधान यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को किसी प्रॉपर्टी से बेचान से सम्बंधित किसी अग्रीमेंट के लिए किसी भी राशि का भुगतान करता है तो उस राशि पर 10% की दर से TDS की कटोती TDS जमा कराना होगा. कोई न्यूनतम सीमा नहीं रखी गयी है.
  1. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
  2. हाउस प्रॉपर्टी आय से आय सम्बंधित प्रावधान
  3. बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
  4. कैपिटल गेन्स आय ( Income From Capital Gain)  से सम्बंधित प्रावधान
  5. अन्य स्रोतों से आय सम्बंधित प्रावधान
  6. इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
  7. पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)

 

Capital Gain - Union Budget

Budget 2017 – Business Income Tax Provisions

Budget 2017 – Business Income Tax Provisions  – बजट-2017 में  बिज़नस  आय  से सम्बंधित प्रावधान 

‘मून सॉफ्ट’ ने बीड़ा उठाया है कि सरल भाषा में संक्षिप्त रूप से भारत सरकार के Budget 2017 के आम करदाता से जुड़े आयकर प्रावधानो को सभी पाठको के लिए प्रस्तुत किया जाए. इस श्रंखला एक पोस्ट  कल प्रकाशित हो चुका है. आज विशेष रूप से Budget 2017 में बिज़नस से आय  से  सम्बंधित प्रावधान का विशेष जिक्र करेंगे . साथ ही बिज़नस से आय  से आय सम्बंधित प्रावधान सम्बंधित लिंक पर क्लिक करके  पूर्व प्रकाशित कुछ अन्य प्रावधान भी पढ़ सकेंगे. बाके बचे हुए प्रावधानों पर भी अगले एक-दो दिन में चर्चा की जायेगी.

Union Budget 2017 में परिवृतित व नए  प्रावधान काफी ज्यादा है, अत: सरलता से समझने व पढ़ने के लिए के लिए Budget 2017  के सभी प्रावधानों को निम्न कुछ बिन्दुओ में बांटा गया है जिनको बारी बारी से सभी पाठक पढ़ सकेंगे –

  1. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
  2. हाउस प्रॉपर्टी आय से आय सम्बंधित प्रावधान
  3. बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान (यही नीचे पढ़े)
  4. कैपिटल गेन्स आय से सम्बंधित प्रावधान
  5. अन्य स्रोतों से आय सम्बंधित प्रावधान
  6. इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से से सम्बंधित प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)
  7. पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान (यहाँ पर क्लिक करके पढ़ सकते है)

कंपनियो, विदेशियों व कई कई मामलों का विवेचन यहां नहीं किया जा रहा है क्योकि उनमे आम करदाता के काम की बात नहीं है. लेखो की श्रंखला के इस भाग में आज बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान, पर विस्तृत  तुलनात्मक चर्चा  करेंगे. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान, इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से  सम्बंधित प्रावधान व पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान  ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते है  –

बिज़नस इनकम (व्यापारिक आय) से सम्बंधित प्रावधान – Budget 2017

धारा वर्तमान प्रावधान नया प्रावधान

35AD

कुछ चयनित बिज़नस के लिए कैपिटल प्रकृति के निवेश ( जेसे मशीन आदि) में छुट के लिए नकदी भुगतान की कोई शर्त नहीं थी. अब 10,000 रू. से ज्यादा नकद भुगतान पर एक तरह से पाबंदी लगा दी गयी है.
40A(3) अभी व्यापारिक खर्चो के लिए एक दिन में एक  व्यक्ति को 20,000/- तक के नकदी भुगतान की इजाजत थी. अब सीमा को घटा कर 10,000/- कर दिया है तथा ऑनलाइन पेमेंट को भी अकाउंट पेयी चेक के समकक्ष माना जाएगा.
32

Depreciation – किसी एसेट्स की पूरी लागत पर डेप्रिसिएशन मिलता था चाहे भुगतान रोकड़ में किया हो या चेक आदि से.

यदि किसी भी सम्पति के खरीद में 10,000/- ज्यादा का निवेश / खर्चा रोकड़ में किया जाएगा तो ऐसे नकद भुगतान पर कोई डेप्रिसिएशन नहीं मिलेगा.
43B किसी भी tax, cess, duty or fee, or interest on any loan or borrowing from any scheduled bank or public financial institution की छुट उसी वर्ष में मिलती है जिस वर्ष में वास्तविक भुगतान किया गया हो या आयकर रिटर्न भरने की तय तारीख से पहले-पहले जमा करा दिया गया हो.

अब यह क़ानून / शर्त  scheduled bank or public financial institution के साथ-साथ सहकारी बैंक के लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर भी लागू होगा.

44AA

लेखा पुस्तक : अभी तक निम्न स्थिति तक लेखा पुस्तके रखने की आवश्यकता नहीं थी –

·         1. यदि व्यापार से वार्षिक आय 1,20,000/- से ज्यादा नहीं थी अथवा

2.      यदि व्यापार का वार्षिक टर्नओवर / बिक्री 10,00,000/- से ज्यादा नहीं थी.

अब निम्न स्थिति तक लेखा पुस्तके रखने की आवश्यकता नहीं होगी –

·         1. यदि व्यापार से वार्षिक आय 2,50,000/- से ज्यादा नहीं हो अथवा

2. यदि व्यापार का वार्षिक टर्नओवर / बिक्री 25,00,000/- से ज्यादा नहीं हो.

44AB

ऑडिट : अभी तक 1.00 करोड़ ज्यादा के बिज़नेस टर्नओवर पर ऑडिट अनिवार्य थी.

अब यह सीमा बढ़ा कर 2.00 करोड़ कर दी गयी है.

44AD

अभी तक बिना ऑडिट वाले केस में 1.00 करोड़ से कम  बिज़नेस टर्नओवर पर टर्नओवर  के  8% रकम को बिज़नेस प्रॉफिट (अधिक घोषणा को छोड़कर) माना जाता था.

अब बिना ऑडिट वाले केस में 2.00 करोड़ से कम  बिज़नेस टर्नओवर पर टर्नओवर  के  8% रकम को बिज़नेस प्रॉफिट (अधिक घोषणा को छोड़कर) माना जाएगा तथा टर्नओवर का जितना भुगतान चेक या ऑनलाइन से प्राप्त होगा, उस भाग के टर्नओवर  के  6% रकम को ही बिज़नेस प्रॉफिट माना जाएगा.
79 पूरी धारा ही बदल दी गयी – Loss Carry Forward मुख्य साधारण बदलाव के अनुसार यदि किसी कंपनी (company in which the public are substantially interested व कुछ और मामलों को छोड़कर) की 50% से ज्यादा शेयर होल्डिंग बदल जाती है तो उस कंपनी को Loss Carry फॉरवर्ड का फ़ायदा नहीं मिलेगा.
80IAC Eligible न्यू start-up बिज़नस की छूट की अपर सीमा 5 वर्ष थी.

Eligible न्यू start-up बिज़नस की छूट  से सम्बंधित 5 साल की अपर सीमा को बढ़ाकर 7 वर्ष  कर दिया गया है.

80-IBA

Housing Projects के लिए प्राप्त छूट के लिए अन्य शर्तो के साथ कुछ ख़ास शर्ते थी –

· Chennai, Delhi, Kolkata and Mumbai (प्लस 25 किलोमीटर की सीमा तक) में रेजिडेंशियल यूनिट की अधिकतम साइज़ built-up area 30 (thirty) square metres है.

अन्य एरिया में रेजिडेंशियल यूनिट की अधिकतम साइज़ built-up area 60 (Sixty) square metres है.

प्रोजेक्ट completion की सीमा 3 वर्ष है.

Housing Projects के लिए प्राप्त छूट के लिए अन्य शर्तो के साथ अब कुछ ख़ास शर्ते है  –

Chennai, Delhi, Kolkata and Mumbai में रेजिडेंशियल यूनिट की अधिकतम साइज़ Carpet area 30 (thirty) square metres रहेगी.

सभी अन्य एरिया में रेजिडेंशियल यूनिट की अधिकतम साइज़ Carpet area 60 (Sixty) square metres रहेगी.

प्रोजेक्ट completion की सीमा 5 वर्ष रहेगी.

115JB

Minimum Alternate Tax की कैलकुलेशन के लिए कम्पनीज एक्ट के प्रावधानों के अनुसार बुक प्रॉफिट को कंसीडर किया जाता रहा है.

Minimum Alternate Tax की कैलकुलेशन के लिए कम्पनीज एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ एकाउंटिंग स्टैण्डर्ड के अनुसार बुक प्रॉफिट को भी कंसीडर किया जायेगा.

132 नए प्रावधान

(क)     अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ सर्च करने से पहले रिकॉर्ड किये जाने वाले विश्वास के कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अप्रैल 1962 से प्रभावी रहेगा.

(ख)     अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ सर्च करने से पहले शंका के कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अक्टूबर 1975 से प्रभावी रहेगा.

(ग)     सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी उच्च अधिकारियों की इजाजत से राजस्व हित में किसी भी सम्पति को अधिकतम 6 महीने के लिए अस्थाइ तोर पर कुर्क कर सकेंगे.

(घ)     सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी किसी भी स्थाई सम्पति को धारा 142A के प्रावधानों के तहत वैल्यूएशन के लिए वैल्यूएशन ऑफिसर रेफ़र कर सकेंगे जिसे 60 दिन के अन्दर-अन्दर वैल्यूएशन रिपोर्ट देनी होगी.

(ङ)      आदि.

132A नया प्रावधान

अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ से कोई भी दस्तावेज, बहुमूल्य ज्वेलरी व नकदी आदि को अन्य किसी विभाग से रिकवीजिसन (मंगाने) से पहले दर्ज किये जाने वाले कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अक्टूबर 1975 से प्रभावी रहेगा.

133(6)

किसी भी लंबित केस में जांच के लिए दस्तावेज आदि मंगवाने का अधिकार.

अब यह अधिकार Joint Director, Deputy Director or Assistant Director को भी होगा जो कि किसी लंबित केस के अभाव में भी नोटिस दे सकेंगे.

133A

अभी तक सर्वे की कार्यवाही व्यापारिक स्थल पर ही होती थी.

अब सर्वे की कार्यवाही धर्मार्थ संस्थानों (स्कूल, कॉलेज आदि) के विरूद्ध भी हो सकेगी.
153A सर्च मामलों में अभी तक चालू वर्ष के साथ-साथ पिछले कुल वर्ष 6 का कर-निर्धारण होता था.

अब यदि किसी केस में 50 लाख से ज्यादा की छिपी हुई आय / सम्पति पुराने वर्षो की उजागर होती है तो अधिकतम पिछले 10 वर्ष तक के केस पुन: खोले जा सकेंगे. यानी की अब इसे मामलों में कुल 11 वर्ष का कर-निर्धारण किया जा सकता है.

153B

सर्च मामलों में कर-निर्धारण की समय सीमा : 21 महीने

 

*सर्च मामलों में कर-निर्धारण की समय सीमा वितीय वर्ष 2018–19 तक  : 18 महीने

*सर्च मामलों में कर-निर्धारण की समय सीमा वितीय वर्ष 2018–19 के बाद   : 12 महीने

153B सर्च से सम्बंधित रिकवीजिसन के मामलों (153C) में कर-निर्धारण की समय सीमा : 9 महीने सर्च से सम्बंधित रिकावीजिसन (153C)  के मामलों में कर-निर्धारण की समय सीमा : 9 महीने
194IC नया प्रावधान

यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को किसी प्रॉपर्टी से बेचान से सम्बंधित किसी अग्रीमेंट के लिए किसी भी राशि का भुगतान करता है तो उस राशि पर 10% की दर से TDS की कटोती TDS जमा कराना होगा. कोई न्यूनतम सीमा नहीं रखी गयी है.

194J

वर्तमान में किसी भी professional फीस के 30,000/- से ज्यादा भुगतान पर 10% की दर से TDS की कटोती करनी होती है.

अब किसी कॉल सेंटर को professional फीस के 30,000/- से ज्यादा भुगतान पर मात्र 2% की दर से TDS की कटोती करनी होगी लेकिन बाकी सब पर 10% की रेट यथावत रहेगी.
197A ब्याज सहित कुछ मामलों में फॉर्म 15G / 15H देने पर 10% की दर से होने वाली TDS की कटोती से छूट  मिलती थी.

अब यह छूट ‘बीमा कमीशन’ (194D) पर भी मिलेगी. अब insurance agent भी  डिक्लेरेशन दे सकेंगे.

206C

TCS – अभी तक 5.00 लाख से ज्यादा की जेवेल्लरी रोकड़ से खरीदने पर 1% की दर से TCS करना होता था.

अब जेवेल्लरी खरीदने पर 1% की दर से TCS को समाप्त कर दिया गया है तथा उसके स्थान पर 3.00 लाख से ज्यादा की जेवेल्लरी या अन्य कुछ भी खरीदने पर रोकड़ से खरीदने पर 100% पेनल्टी का प्रावधान किया गया है.
206CC नया प्रावधान

TCS – यदि जिससे  TCS होना है , वह व्यक्ति अपना सही PAN नहीं देता है तो दोगुनी रेट या 5% (जो भी ज्यादा हो) की  दर से TCS करना होगा. यह प्रावधान विदेशियों पर लागू नहीं होगा.

CA. K.C.Moondra

Budget 2017 - Finance Bill 2017

 

Salaried Taxpayer in Budget 2017

Salaried Taxpayer in Budget 2017  – वेतनभोगी करदाता के लिए क्या विशेष है  ?   

Moon Soft  ने बीड़ा उठाया है कि सरल भाषा में संक्षिप्त रूप से भारत सरकार के वितीय  बजट – 2017 के आम करदाता से जुड़े आयकर प्रावधानो को Salaried Taxpayer सहित सभी पाठको के लिए प्रस्तुत किया जाए.  प्रावधान काफी ज्यादा है, अत: सरलता से समझने व पढ़ने के लिए के लिए सभी प्रावधानों को निम्न कुछ बिन्दुओ में बांटा जा रहा है –

  1. वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (Salaried Taxpayer)
  2. हाउस प्रॉपर्टी आय से आय सम्बंधित प्रावधान
  3. बिज़नस इनकम से सम्बंधित प्रावधान
  4. कैपिटल गेन्स आय से सम्बंधित प्रावधान
  5. अन्य स्रोतों से आय सम्बंधित प्रावधान
  6. इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से से सम्बंधित प्रावधान
  7. पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान

कंपनियो, विदेशियों व कई कई मामलों का विवेचन यहां नहीं किया जा रहा है क्योकि उनमे आम करदाता के काम की बात नहीं है. लेखो की श्रंखला के इस भाग मे वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (Salaried Taxpayer), इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो  से सम्बंधित प्रावधान व पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान आदि   विषयो  पर कुछ ख़ास प्रावधानो पर नीचे चर्चा करेंगे –

वेतन से आय सम्बंधित प्रावधान (Salaried Taxpayer)

धारा वर्तमान प्रावधान नया प्रावधान

80CCD

वर्तमान में केंद्र सरकार के अलावा अन्य कर्मचारियों को सरकार द्वारा notified पेंसन फण्ड में जमा राशि पर छूट मिलती थी जिसकी अधिकतम सीमा सकल कुल आय (Gross Total Income) की 10% थी.

इस छूट की सीमा को 20% तक बढ़ा दिया गया है.

 इनकम टैक्स रेट्स व साधारण छूटो से सम्बंधित प्रावधान (Salaried Taxpayer)

धारा वर्तमान प्रावधान नया प्रावधान
10(13A) नया प्रावधान

राजानीतिक पार्टियो द्वारा रू. 2,000/- से ज्यादा का चन्दा रोकड़ से लेने पर उस आय पर tax लगेगा.

80CCD

वर्तमान में केंद्र सरकार के अलावा अन्य कर्मचारियों को सरकार द्वारा notified पेंसन फण्ड में जमा राशि पर कटोती मिलती थी जिसकी अधिकतम सीमा सकल कुल आय (Gross Total Income) की 10% थी.

इस कटोती की सीमा को 20% तक बढ़ा दिया गया है.

80CCG अभी तक notified equity savings scheme में अधिकतम 12,500/- की कटोती मिलती थी.

नए सिरे से यह कटोती समाप्त कर दी गयी है.

80G

रू.10,000/- से ज्यादा नकदी दान (Donation) पर कटोती नहीं मिलती थी.

अब रू. 2,000/- से ज्यादा नकदी दान (Donation) पर कटोती नहीं मिलेगी.

87A

यदि कुल आय 5.00 लाख से कम  है तो अधिकतम  2,000/- की रिबेट इनकम-tax में से मिलती थी जिससे 2.70 तक की कुल आय पर शून्य आयकर बनता था.

यदि कुल आय 3.50 लाख से कम  है तो अधिकतम  2,500/- की रिबेट इनकम-tax में से मिलेगी जिससे 3.00  लाख तक की कुल आय पर शून्य आयकर बनेगा यानिकी यदि कुल आय 3.00 लाख तक ही है तो वह पूर्णत: आयकर मुक्त रहेगी.

115JB

Minimum Alternate Tax की कैलकुलेशन के लिए कम्पनीज एक्ट के प्रावधानों के अनुसार बुक प्रॉफिट को कंसीडर किया जाता रहा है.

Minimum Alternate Tax की कैलकुलेशन के लिए कम्पनीज एक्ट के प्रावधानों के साथ एकाउंटिंग स्टैण्डर्ड अनुसार बुक प्रॉफिट को कंसीडर किया जायेगा.

132 नए प्रावधान

(क)     अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ सर्च करने से पहले रिकॉर्ड किये जाने वाले विश्वास के कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अप्रैल 1962 से प्रभावी रहेगा.

(ख)     अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ सर्च करने से पहले शंका के कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अक्टूबर 1975 से प्रभावी रहेगा.

(ग)     सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी उच्च अधिकारियों की इजाजत से राजस्व हित में किसी भी सम्पति को अधिकतम 6 महीने के लिए अस्थाइ तोर पर कुर्क कर सकेंगे.

(घ)     सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी किसी भी स्थाई सम्पति को धारा 142A के प्रावधानों के तहत वैल्यूएशन के लिए वैल्यूएशन ऑफिसर रेफ़र कर सकेंगे जिसे 60 दिन के अन्दर-अन्दर वैल्यूएशन रिपोर्ट देनी होगी.

(ङ)      आदि.

132A नया प्रावधान

अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ से कोई भी दस्तावेज, बहुमूल्य ज्वेलरी व नकदी आदि को अन्य किसी विभाग से रिकवीजिसन (मंगाने) से पहले दर्ज किये जाने वाले कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अक्टूबर 1975 से प्रभावी रहेगा.

133(6)

किसी भी लंबित केस में जांच के लिए दस्तावेज आदि मंगवाने का अधिकार.

अब यह अधिकार Joint Director, Deputy Director or Assistant Director को भी होगा जो कि किसी लंबित केस के अभाव में भी नोटिस दे सकेंगे.

133A अभी तक सर्वे की कार्यवाही व्यापारिक स्थल पर ही होती थी.

अब सर्वे की कार्यवाही धर्मार्थ संस्थानों (स्कूल, कॉलेज आदि) के विरूद्ध भी हो सकेगी.

     

पेनल्टी व अन्य गंभीर प्रावधान (Salaried Taxpayer)

धारा वर्तमान प्रावधान नया प्रावधान
132 नए प्रावधान
  • अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ सर्च करने से पहले रिकॉर्ड किये जाने वाले विश्वास के कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अप्रैल 1962 से प्रभावी रहेगा.
  • अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ सर्च करने से पहले शंका के कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अक्टूबर 1975 से प्रभावी रहेगा.
  • सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी उच्च अधिकारियों की इजाजत से राजस्व हित में किसी भी सम्पति को अधिकतम 6 महीने के लिए अस्थाइ तोर पर कुर्क कर सकेंगे.
  • सर्च केस में अब अधिकृत अधिकारी किसी भी स्थाई सम्पति को धारा 142A के प्रावधानों के तहत वैल्यूएशन के लिए वैल्यूएशन ऑफिसर रेफ़र कर सकेंगे जिसे 60 दिन के अन्दर-अन्दर वैल्यूएशन रिपोर्ट देनी होगी.
  • आदि.
132A नया प्रावधान

अब किसी भी व्यक्ति के यहाँ से कोई भी दस्तावेज, बहुमूल्य ज्वेलरी व नकदी आदि को अन्य किसी विभाग से रिकवीजिसन (मंगाने) से पहले दर्ज किये जाने वाले कारणों को हाई कोर्ट से नीचे तक किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं रहेगी. यह प्रावधान भूतलक्षी प्रभाव से 1 अक्टूबर 1975 से प्रभावी रहेगा.

133(6)

किसी भी लंबित केस में जांच के लिए दस्तावेज आदि मंगवाने का अधिकार.

अब यह अधिकार Joint Director, Deputy Director or Assistant Director को भी होगा जो कि किसी लंबित केस के अभाव में भी नोटिस दे सकेंगे.

133A

अभी तक सर्वे की कार्यवाही व्यापारिक स्थल पर ही होती थी.

अब सर्वे की कार्यवाही धर्मार्थ संस्थानों (स्कूल, कॉलेज आदि) के विरूद्ध भी हो सकेगी.

139(4C)  

any person referred to in clause (23AAA), Investor Protection Fund referred to in clause (23EC) or clause (23ED), Core Settlement Guarantee Fund referred to in clause (23EE) and Board or Authority referred to in clause (29A) of section 10 को भी अब आयकर रिटर्न भरना होगा.

139(5)

कोई भी करदाता कर-निर्धारण वर्ष की समाप्ति से एक वर्ष के अन्दर-अन्दर अपने आयकर रिटर्न में भूल क सुधार कर सकता है.

अब कोई भी करदाता कर-निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पहले पहले ही अपने आयकर रिटर्न में भूल  सुधार कर सकेगा. अन्य प्रावधान यथावत है.

140A

स्व: कर-निर्धारण में tax के साथ-साथ / tax से पहले देय ब्याज भी जमा करना होता है.

स्व: कर-निर्धारण में tax व ब्याज के साथ-साथ देरी से रिटर्न जमा करने की देय फीस भी जमा करानी  होगी.

153 कर-निर्धारण की समय सीमा –

*धारा 143 / 144 : 21 महीने

*धारा 147       : 9 महीने

*धारा 254/263/264 : 9 महीने

कर-निर्धारण की समय सीमा –

*धारा 143 / 144 : मात्र 12 महीने

*धारा 147       : 12 महीने

*धारा 254/263/264 : 12 महीने

153A

सर्च मामलों में अभी तक चालू वर्ष के साथ-साथ पिछले कुल वर्ष 6 का कर-निर्धारण होता था.

अब यदि किसी केस में 50 लाख से ज्यादा की छिपी हुई आय / सम्पति पुराने वर्षो की उजागर होती है तो अधिकतम पिछले 10 वर्ष तक के केस पुन: खोले जा सकेंगे. यानी की अब इसे मामलों में कुल 11 वर्ष का कर-निर्धारण किया जा सकता है.

153B

सर्च मामलों में कर-निर्धारण की समय सीमा : 21 महीने

 

 

 

 

 

 

 

  • सर्च मामलों में कर-निर्धारण की समय सीमा वितीय वर्ष 2018–19 तक  : 18 महीने

 

*सर्च मामलों में कर-निर्धारण की समय सीमा वितीय वर्ष 2018–19 के बाद   : 12 महीने

153B सर्च से सम्बंधित रिकवीजिसन के मामलों (153C) में कर-निर्धारण की समय सीमा : 9 महीने सर्च से सम्बंधित रिकवीजिसन (153C)  के मामलों में कर-निर्धारण की समय सीमा : 9 महीने
194IB नया प्रावधान यदि कोई भी व्यक्ति (Individual) या HUF किसी भी व्यक्ति को रू. 50,000/- मासिक किराये से ज्यादा भुगतान करता है तो ऐसे प्रत्येक व्यक्ति (Individual) या HUF को 5% दर से TDS की कटोती कर TDS जमा कराना होगा.
194IC नया प्रावधान यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को किसी प्रॉपर्टी से बेचान से सम्बंधित किसी अग्रीमेंट के लिए किसी भी राशि का भुगतान करता है तो उस राशि पर 10% की दर से TDS की कटोती TDS जमा कराना होगा. कोई न्यूनतम सीमा नहीं रखी गयी है.
194J वर्तमान में किसी भी professional फीस के 30,000/- से ज्यादा भुगतान पर 10% की दर से TDS की कटोती करनी होती है. अब किसी कॉल सेंटर को professional फीस के 30,000/- से ज्यादा भुगतान पर मात्र 2% की दर से TDS की कटोती करनी होगी लेकिन बाकी सब पर 10% की रेट यथावत रहेगी.
197A ब्याज सहित कुछ मामलों में फॉर्म 15G / 15H देने पर 10% की दर से होने वाली TDS की कटोती से छूट  मिलती थी. अब यह छूट ‘बीमा कमीशन’ (194D) पर भी मिलेगी. अब insurance agent भी  डिक्लेरेशन दे सकेंगे.
206C TCS – अभी तक 5.00 लाख से ज्यादा की जेवेल्लरी रोकड़ से खरीदने पर 1% की दर से TCS करना होता था. अब जेवेल्लरी खरीदने पर 1% की दर से TCS को समाप्त कर दिया गया है तथा उसके स्थान पर 3.00 लाख से ज्यादा की जेवेल्लरी रोकड़ से खरीदने पर 100% पेनल्टी का प्रावधान किया गया है.
206CC नया प्रावधान TCS – यदि जिससे  TCS होना है , वह व्यक्ति अपना सही PAN नहीं देता है तो दोगुनी रेट या 5% (जो भी ज्यादा हो) की  दर से TCS करना होगा. यह प्रावधान विदेशियों पर लागू नहीं होगा.
234F & 271F नया प्रावधान

Late Fee : यदि आयकर रिटर्न समय भी नहीं भरा गया तो वर्त्तमान पेनल्टी के स्थान पर निम्न दर से Late Fee जमा करानी होगी –

*यदि रिटर्न देय तिथि के बाद लेकिन 31 दिसम्बर से पहले भरा जाता है – रू. 5,000/-.

*यदि रिटर्न 31 दिसम्बर के बाद भरा जाता है – रू. 10,000/-.

लेकिन यदि कर योग्य आय रू. 5.00 लाख से कम है तो अधिकतम फीस रू.  1,000/- ही होगी.

241A नया प्रावधान यदि किसी करदाता का आयकर की धारा 143(1) में रिफंड बनता है तो राजस्व हित में कर-निर्धारण अधिकारी उच्च अधिकारियों की इजाजत से कर-निर्धारण होते तक रिफंड रोक सकेगा.
269ST &

271DA

नया प्रावधान

कोई भी व्यक्ति किसी एक सोदे के पेटे एक दिन में 3.00 लाख या ज्यादा का भुगतान नकदी स्वीकार नहीं कर सकेगा. बिना किसी पर्याप्त कारण के क़ानून के उल्लंघन पर 100% प्रतिशत पेनल्टी लगेगी जो की जॉइंट कमिश्नर द्वारा लगाईं जायेगी.

इस प्रावधान से सरकारी विभाग / बैंक आदि के साथ व्यवहार व वास्तविक काश्तकार की कृषि आय के भुगतान आदि  पर लागू नहीं होगा.

271J नया प्रावधान

किसी भी सीए, , “merchant banker” and “registered valuer” द्वारा आयकर विभाग में बिना किसी पर्याप्त कारण के असत्य रिपोर्ट या सर्टिफिकेट देने पर रू. 10,000/- पेनल्टी लगेगी.

 Budget - Finance Bill 2017 for Salaried Taxpayer